परासरण किसे कहते हैं? || parasaran kya hai (prasaran kya hai ?)

 

prasaran kya hai  , परासरण और विसरण में क्या अन्तर होता हैं परासरण कितने प्रकार के होते हैं ? , परासरण नियमन क्या हैं ? इसके उदहारण क्या हैं परासरण के बारे में जानने के लिए इन सभी विषयों के बारे में जानकारी हो ना बहुत जरूरी हैं | इसलिए आज की इस पोस्ट में हम आपको इससे सम्बंधित पूरी जानकारी देने वाले हैं | इसलिए इस पोस्ट को पूरा रीड कीजिय क्योंकि आज आप बहुत कुछ नया सिखने वाले हैं |

परासरण किसे कहते हैं

अन्तः परासरण किसे कहते हैं ?

बाह्य परासरण किसे कहते हैं ?

परासरण के उदाहरण ?

परासरण दाब क्या हैं ?

प्रतिलोम परासरण किसे कहते हैं?

परासरण का महत्व ?

पोधो में परासरण क्या हैं ?

विसरण किसे कहते हैं?

परासरण तथा विसरण में क्या अंतर हैं ?

परासरण की खोज किसने की ?

 

 परासरण किसे कहते हैं

विलयनो में गैसों की भांति अपने सभी भागो में सांद्रण समान रखने की प्रवृति होती हैं ओर यह प्रवृति विलय कणों के विसरण के कारण ही होती हैं | इस प्रवृति के कारण विलयन एक महत्वपूर्ण गुण प्रदर्शित करता हैं | जिसे परासरण कहते हैं |

परासरण की क्रिया के लिए दो विलयनो को एक ऐसी अर्धपारगम्य झिल्ली के बीच रखा जाता हैं | जो विलायक के कणों को तो अपने अन्दर से जाने देती हैं लेकिन विलय के कणों को नही जाने देती हैं | वनस्पति तथा जंतु झिल्लियाँ इस प्रकार की होती हैं इन्हें कृत्रिम रूप से भी बनाया जा सकता हैं |

जब एक विलयन तथा शुद्ध विलायक को एक अर्धपारगम्य झिल्ली की सहायता से अलग करके रखा जाता हैं तो विलायक अपनी अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की और जाने लगता हैं उस घटना को परासरण कहते हैं |  

या

जब दो विलयनो को एक अर्धपारगम्य झिल्ली की सहायता से अलग अलग करके रखा जाता हैं तो विलियन अपनी कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की और जाने लगता हैं इस घटना को परासरण कहते हिं |

 

अन्तः परासरण किसे कहते हैं ?

यह परासरण अधिकतर कोशिकाओ में देखा जाता हैं जब कोशिकाए बाहर से अपने अन्दर विलायक को ग्रहण करती है तो इस घटना को अन्तः परासरण कहते हैं | जैसे किसमिस को पानी में डालने के बाद वह फूल जाती हैं | चने को रात में पानी में डालने के बाद सुबह तक वह फूल जाते हैं | अंडे को उबालते समय वह फूट जाते हैं क्योंकि उनके अन्दर जल प्रवेश कर जाता हैं इसलिए अन्डो को उबालने से पहले पानी में नमक मिलाया जाता हैं ताकि पानी की सांद्रता बढाई जा सकते और जिस कारण अंडे के अन्दर पानी नही घुस पाता हैं |

 

बाह्य परासरण किसे कहते हैं ?

 जब कोशिकाओ या उत्तको के अन्दर से जल बाहर गमन करता हैं तो इस परासरण को बाह्य परासरण कहते हैं | जैसे अंगूर को चासनी में डालकर रखने से वह सिकुड़ जाते हैं |

 

परासरण के उदाहरण ?

·         मिटटी से पानी पेड़ पोधो की जड़ो में प्रवेश परासरण द्वारा ही करता हैं |

·         किसमिस को पानी में रखने से वह फूल जाती हैं |

·         परासरण की क्रिया से विलियन से विलायक को अलग किया जा सकता हैं |

·         परासरण की क्रिया से जल में रखे जाने फूल जाते हैं

 

परासरण दाब क्या हैं ?

 

जब विलयन तथा सुद्ध विलायक को एक अर्धपारगम्य झिल्ली की सहायता से अलग करके रखा जाता हैं तो परासरण की क्रिया विलायक के अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की और होती हैं अब यदि विलयन पर ऊपर से एक दाब लगाया जाता हैं तो परासरण की क्रिया रुक जाती हैं | लेकिन यदि विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगा दिया जाता हैं तो परासरण की क्रिया विपरीत दिशा में होने लगती हैं इस दाब को परासरण दाब कहते हैं |  

 

प्रतिलोम परासरण किसे कहते हैं?

यदि विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगा दिया जाता हैं तो परासरण विपरीत दिशा में संपन्न होने लगता हैं अर्थात विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से विलयन से विलायक की और जाने लगता हैं इस घटना को प्रतिलोम परासरण कहते हैं |

व्युत्क्रम परासरण का उपयोग समुंदरी जल के विनम्निकरण में किया जाता हैं जब समुंदरी जल पर परासरण दाब से अधिक दाब आरोपित किया जाता हैं तो शुद्ध जल अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर समुंदरी जल से निष्कासित हो जाता हैं |

 

परासरण का महत्व ?

 

परासरण पोधो के लिए एक बहुत ज्यादा महत्व रखता हैं परासरण की बिना पोधो का जीवन exist ही नही करता हैं |

·         पोंधो में root hairs द्वारा का अवशोषण तथा पोंधो में एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जल का विसरण परासरण द्वारा ही होता हैं |

·         कोशिका की turgidity परासरण पर निर्भर करती हैं यह अवस्था सभी कोशिकीय क्रियाओ के लिए आवश्यक होती हैं |

·         जल का पोंधो के विभिन्न अंगो में वितरण परासरण द्वारा ही होता हैं |

·         यह क्रिया पादपो को हिमीकरण तथा सुष्कन के प्रति प्रतिरोधी बनती हैं |

 

पोधो में परासरण क्या हैं ?

परासरण की क्रिया के कारण ही पेड़ पोंधे servive कर पते हैं | पोंधो में परासरण की क्रिया एक important रोल रखती हैं | पेड़ पोंधे करोडो कोशिकाओ से मिलकर बने होते हैं और प्रत्यक कोशिका में एक अर्धपारगम्य झिल्ली होती हैं इसलिए कोशिका के विलायक एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जाते हैं | जो की परासरण की कारण ही हो पता हैं | जिस कारण पेड़ पोंधो की सभी कोशिकाओं को आवश्कता अनुसार विलायक यानि जल या अन्य द्रव्य पदार्थो की पूर्ति होती रहती हैं |

 

परासरण तथा विसरण में क्या अंतर हैं ?

 

      परासरण

   विसरण

विलायक तनु विलयन से सान्द्र विलयन की और जाना परासरण कहलाता हैं |

 

परासरण की क्रिया होने के लिए एक अर्ध पारगम्य झिल्ली का होना आवश्यक होता हैं|

जैसे किसमिस को पानी में डालने से किसमिस फूल जाती हैं |  

दो या दो से अधिक विलयनो का स्वतः मिलना विसरण कहलाता हैं |

 

 

 

विसरण की क्रिया होने के लिए कोई अर्धपारगम्य झिल्ली की जरूरत नही होती हैं |

 

जैसे – पानी में नमक गिराने से नमक पानी में खुद खुलने लगता हैं |

 

परासरण की खोज किसने की ?

एबे नोलेट ne सबसे पहले परासरण की क्रिया के बारे में ज्ञान हासिल किया था |

निष्कर्ष –

 

इस पोस्ट में हमने आपको परासरण किसे कहते हैं के बारे में कम्पलीट जानकारी दी है यदि इस पोस्ट से रिलेटेड कोई टॉपिक अपने छुट गया हो तो आप आपसे कमेंट सेक्शन में भी पूछ सकते हैं हम आपके प्रश्न का जवाब अवश्य देंगे | और इस पोस्ट को अपने दोस्तों में शेयर करना मत भूलना |

 

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